ब्रह्मांड गति से परिभाषित है। क्वांटम स्तर पर, ऊर्जा निरंतर कंपन की अवस्था में रहती है; जिस क्षण यह गति रुकती है, अस्तित्व ही ढह जाएगा। इस मूलभूत वास्तविकता के बावजूद, मनुष्य अक्सर परिवर्तन के साथ एक विरोधाभासी संघर्ष
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